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शनिवार, 13 फ़रवरी 2010

शिक्षा प्रेमी वासुदेव भगत का निधन


संगीत महाविद्यालय के संस्थापक एवं कई महाविद्यालयों की स्थापना में अग्रणी भूमिका निभाने वाले गजाधर भगत महाविद्यालय से सेवानिवृत्त प्रधान लिपिक वासुदेव भगत का शुक्रवार की रात अपने प्रोफेसर कालोनी स्थित आवास पर रक्त चाप बढ़ने से निधन हो गया। वे 78 वर्ष के स्वास्थ्य मानसिकता वाले समाज सेवी एवं शिक्षा प्रेमी थे। श्री भगत ने अपने जीवन काल में नवगछिया को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की अग्रणी भूमिका निभाई। इस दौरान गजाधर भगत महाविद्यालय, मदन अहल्या महिला महाविद्यालय, बनारसी लाल सराफ वाणिज्य महाविद्यालय सहित कई अन्य महाविद्यालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना भी कराई। उनके अंतिम दर्शन के लिए शनिवार को सुबह से लोगों का तांता लगा रहा। श्री भगत के चार पुत्र हैं। रविवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010

समाजसेवी मावंडिया का निधन

नवगछिया बाजार के प्रमुख धर्मावलंबी व समाजसेवी विश्र्वनाथ मावंडिया का निधन पिछले दिनों हृदयगति रूकने से हो गया। परिजनों के अनुसार हृदयाघात से कुछ ही समय पूर्व वो एक शादी समारोह से होकर लौटे थे। शहर के सभी प्रमुख धार्मिक क्रियाकलापों में स्व. मावंडिया की अग्रणी भूमिका रहती थी। बुधवार को अंतिम संस्कार के लिए उनका पार्थिव शरीर बरारी घाट लाया गया।

रविवार, 17 जनवरी 2010

ज्ञानेश्वर बाबू के अंतिम दर्शन को उमड़ी भीड़


पूर्व सांसद ज्ञानेश्र्वर प्रसाद यादव का रविवार को उनके पैतृक आवास नारायणपुर में दोपहर 12.25 बजे निधन हो गया। वे 85 वर्ष के थे। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को नारायणपुर गंगा घाट पर किया जाएगा।
पूर्व सांसद ज्ञानेश्र्वर प्रसाद यादव के निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। लोगबाग उनका अंतिम दर्शन करने के लिए उनके पैतृक आवास पर दोपहर बाद से ही जुटने लगे। इस दौरान गोपालपुर विधायक नरेन्द्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल, बिहपुर विधायक शैलेश कुमार उर्फ बूलो मंडल, भाजपा तकनीकी मंच के प्रदेश अध्यक्ष ई. शैलेन्द्र, राजद के प्रदेश महासचिव अशोक कुमार यादव व दिनेश यादव उनके आवास पहुंचे तथा शोक संवेदना व्यक्त की। पूर्व सांसद क्षेत्र की राजनीति के प्रणेता के रूप में जाने जाते थे। ज्ञानेश्र्वर बाबू ने राजनीतिक जीवन वर्ष 1952 में मुखिया के रूप में शुरू की थी। 1957 में भी वे मुखिया चुने गए। वर्ष 1967 में वे पहली बार बिहपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे। 1971 में कटिहार एवं 1977 में खगडि़या लोकसभा क्षेत्र से वे सांसद चुने गए। 1990 में वे गोपालपुर विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए तथा भागलपुर विकास प्राधिकारण के अध्यक्ष रहे। नारायणपुर स्थित जेपी कालेज के विकास में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। वे जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे एवं 1990 में वे भारतीय जनता पार्टी से विधायक दल के उपनेता भी रहे। किशनगंज मेडिकल कालेज के वे ट्रस्टी बोर्ड के चेयरमैन भी थे। वे अपने पीछे पुत्र सुभाष प्रसाद यादव एवं पौत्र डा. संजीव एवं राजीव छोड़ गए हैं।