मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

दो राजस्व कर्मचारी निलंबित

रिश्वतखोरी तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ भागलपुर के जिला पदाधिकारी राहुल सिंह के चलाए गए मुहिम के तहत दो राजस्व कर्मचारियों पर गाज गिरी है। जगदीशपुर अंचल के राजस्व कर्मचारी अमरेन्द्र पांडेय और दशरथ दास को डीएम के आदेश पर निलंबित कर दिया गया है। दोनों पर प्राथमिकी दर्ज करने का भी आदेश है। मालूम हो कि एक पखवारा पूर्व डीएम के जनता दरबार में दोनों के खिलाफ शिकायत प्राप्त हुई थी। इस शिकायत की जांच गोपनीय प्रभारी विजय उपाध्याय, सदर अनुमंडल पदाधिकारी सुनील कुमार तथा भूमि सुधार उप समाहर्ता राशिद हुसैन ने की थी। जांच में मामला सही पाया गया। जिसके बाद दोनों के खिलाफ कार्रवाई हुई है।

भागलपुर की मंडी में नासिक का प्याज

नासिक का प्याज भागलपुर की मंडी में पहुंचने लगा है। नासिक में प्याज की नई फसल तैयार हो गई है। तैयार फसल पटना के रास्ते रैक से भागलपुर आ रही है। कुछ दिन पहले एक रैक भरने लायक भी प्याज की आपूर्ति नासिक से नहीं हो पा रही थी। इस वजह से ट्रक के माध्यम से प्याज भागलपुर की मंडी आ रही है।

प्याज के थोक विक्रेता रंजीत साह बताते हैं कि जनवरी के पहले सप्ताह में प्याज की थोक कीमत 3000 रुपए से 4200 रुपए प्रति क्विंटल थी, जो 25 से 31 जनवरी के बीच कीमत 1000 रुपए से 2000 रुपए तक आ पहुंची है।

वहीं प्याज का खुदरा मूल्य 15 से 25 रुपए है। 15 रुपए में छोटा और कम क्वालिटी वाला प्याज मंडी में मिल रहा है। उच्च क्वालिटी का प्याज 25 रुपए प्रति किलो के आसपास मिल रहा है। वहीं मोहल्ले में फूटपाथी दुकानदार अभी भी 35 रुपए प्रतिकिलो तक प्याज की कीमत ले रहे हैं। प्याज व्यापारी प्रकाश कहते हैं प्याज की कीमत में अभी और कमी आएगी। होली के आसपास जैसे ही बाजार में स्थानीय फसल की आवक शुरू होगी मूल्य पूरी तरह सामान्य हो जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में अभी नासिक और गुजरात से प्याज आ रही है। प्याज की कीमत नियंत्रित होने का सबसे बड़ा कारण नए फसल का बाजार में आना है। इस दौरान मौसम ने भी साथ दिया। यदि मौसम दगा दे जाता तो प्याज की कीमत नियंत्रित होने में काफी परेशानी हो जाती। जमाखोरी के कारण प्याज की कीमत में इजाफा होने की संभावना बहुत कम रहती है। उन्होंने भागलपुर और आसपास में प्याज की खपत के बारे बताया कि प्रत्येक दिन एक ट्रक प्याज यानी करीब 10 टन प्याज की खपत है। जब प्याज की कीमत 40 रुपए प्रति किलो से अधिक थी तो बाजार से प्याज की रौनक गायब थी। इस दौरान प्याज की खपत 50 प्रतिशत से भी कम हो गई थी।